Wednesday, 4 July 2018

राजपूत वंशावली और सृष्टि की रचना (भागवत के अनुसार ) भाग-2 Rajput histoy in hindi

सृष्टि की रचना (भागवत के अनुसार ):-

1 क्षीर सागर में शयन कमलापति पर यण की नाभि से कमछ उत्पन्न हुवा ।
2 कमल से ब्रह्मा हुये ब्रह्मा ने अपने योग बल द्वारा मन से मानसिक पुत्र उत्पन्न किये.
1 सन 2 सनंदन 3 सनातन 4 सनकुमार ये चारों अवतार माने गये हैं जो 5-5 वर्ष की सदावस्था में विरक्त हो गये.

 शिव, नारद, कर्दम, विक्रीत, शेष, संश्र्प,स्थाणु , मरिची, अत्री,क्रतु,पुलस्त, आगिरा,प्रचेता, पुलह,दक्ष, विवश्वान, अरिष्टनेमी ,रुचि, वशिष्ठ,स्वायंभुमनु आदिक अनेक हुए हे.

कन्या, सरस्वती और सत रूपा (सरस्वती नारायण को व्याही (ब्रह्म वैवर्त पुराण)

स्वायंभू मनु ने सतरूपा से विवाह किया. जिससे मैथुनी स्रष्टि उत्पन्न हुई । सवदियभूमनु के पुत्र हुए 1 प्रिय व्रत 2 उत्तानपाद. उत्तानपाद के 2 रानियां थी. पहली सुरुचि से उत्तम पुत्र, दूसरी सुनीति से धूरुव हुए जो विश्व विख्यात हे . राजा प्रियव्रत से 10 पुत्र उत्पन्न हुए, जिसमे 3 , 1 महावीर 2 सवन, 3 कवी ये तो विरक्त हो गये, शेष 7 पुत्रो को 7 दीप दिये गये वे सातों द्वार के राज्य किये।

स्वायंभू मनु के 2 कन्या थी, 1 अकूती रुचि को ब्याही, 2 देवहुती ( राजा तृणबिन्दु की कन्या जिसके जय,विजय उत्पन हुये)  देवदूती कर्दम को ब्याही, जिसके कपिल सांख्य के कर्ता अवतार माना गया। देवहुति से 2 कन्या हुई, 1 असू धति जो वशिष्ठ को  ब्याही, जिसके मेधातिथि, मेधातिथि के पाराशर, पाराशर के व्यास, व्यास के शुकदेव' वेश्म पायन — दूसरी असी दक्ष प्रजापति को ब्याही.

(मरिची को सम्भूति , अत्रि को अनुसूया , पुलइ को क्षमा, पुलस्य को प्रीति, ऋतु को सन्तत्ति, अंगिरा को स्मृति) अंगिरा के 1 गोतम गोतम के चिरकारी हुवा. 2 बृहस्पत हुआ ,अत्री के अनसूया से, दत्तात्रेय अवतार हुवा, और दुरवासा तथा चन्द्रमा हुआ .

3    मरिची ऋषि के कश्यप, सम्भूति से उत्पन्न हुये
4    कश्यप दक्ष प्रजापति के असिस्त्र से 10 हजार पुत्र और 62 कन्या उत्पन्न हुई, जिसमें शिव को सती, सूय को सवर्णों  व्याही

धर्म कों 10 कन्या ब्याही, 1 भानु से (ऋषभ, उन से इन्द्र सेन 2 लूम्बा से ( विधुत उससे मेघ) 3 ककवक से ( संकट, विकट किल्ले के पुत्र 4 जामी से (स्वर्ग,उस से नंद ) 5 विश्वा से ( विश्वदेव से विश्वरूप 6 साघा से ( साघ गण ) 7 मृत्युवतिका से (इन्द्र, ऊपेन्द्र ) 8 वसुका से (अष्ट वसू ) 9 मुहुर्ता से (महुर्त का देवता) 10 संकला से ( संकलादि )

चन्द्रमा को 27 कन्या जो अश्विनी आदि प्रसिद्ध है.

भूत को - 2 कन्या 1 स्वरूपा 2 शांता शांता से (11 रुद्र , 1 रेवत 2अज्ञ 3 भव 4 भीम 5 वाम 6 वप्र 7  वृक्षकपि 8 अजेपाद 9 अहि ब्रघ्न्य 10] बहुरूप 11 महान.

अंगिरा को दो कन्या हुई 1 सुवा से ( पित्र लोक के देवता )  दूसरी मधु से ब्रहस्पत , ब्रहस्पत के भारद्वाज के तारा स्त्री से द्रोणाचार्य इनके क्रमी से अश्वथामा.

क्रपास्व प्रजापति को दो कन्या ब्याही 1 विनता, (विनता से अरुण, गरुड़) 2 कन्द्रू से (सुर्योदी ) 3 पतंगी से पक्षी आदि 4 यामिनी से टीडी आदि 5 नेमनी से जलचर, 6 सरमा से कुत्ता आदि, 7 ताम्रा से ग्रदादी 8 क्रोध वसा से बिच्छु आदि , 9 मनी से अप्सरा आदि 10 इला से वर्क्षादी 11 सुरमा से राक्षादि 12 अरिष्टा से गंधवोदी 13 कष्ट से घोडाआदि 12 दनु से दानव 13 हरिया से हिरण, बकरी 14 दिती से हिरणयाश्र, हिरणयाश्र से प्रहलाद, प्रहलाद के बहिलोचन, बहिलोचन के बलि , बलि के बाणासुर, 15 अदिति से सूर्य और त्वष्टादी देवता.
अगला भाग:- Rajput history part-3

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